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बिहार में इन दिनों राजनीतिक बदलाव का दौर जारी है। 2019 के आम चुनाव से पहले एनडीए और यूपीए दोनों अपने-अपने कुनबे को बचाने के साथ इसे बढ़ाने की कोशिश में भी हैं। आरजेडी में लालू प्रसाद यादव के जेल जाने के बाद यह जिम्मेदारी 26 साल के तेजस्वी यादव के जिम्मे आ गई है। इस युवा नेता के सामने है क्या है चुनौतियां? लालू की गै रमौजूदगी में वह कैसे पार्टी को रफ्तार और धार देंगे। ऐसे तमाम सवालों पर नवभारत टाइम्स ने उनसे बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:-

- लालू प्रसाद यादव अब बिहार की राजनीति से लंबे समय तक बाहर रह सकते हैं? लालू बिना आरजेडी बिहार में कितनी कारगर होगी?

तेजस्वी यादव: ऐसा पहली बार नहीं है। 1997 में भी लालू प्रसाद यादव को बिहार से दूर रखा गया था। मेरी मां राबड़ी देवी सीएम बनीं। तब भी ऐसे ही सवाल उठाए गए। हमारे अंत की मर्शिया लिख दी गई। सबने कहा कि अब पार्टी समाप्त, लेकिन जब-जब लालू प्रसाद मुसीबत में होते हैं, राज्य का हर वंचित, शोषित और हाशिए पर रहने वाल समाज अपने लिए मुसीबत मान लेता है और हम और मजबूत होकर निकलते हैं। आज भी फिर वही कहा-किया जा रहा है। लालू प्रसाद यादव को परेशान करने की हर हद पार कर दी गई। हमारे पूरे परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। लेकिन कहते हैं ना- "उन्होंने हमें दफनाने की कोशिश की, उन्हें नहीं पता था कि हम बीज थे।

- क्या लालू के बाद तेजस्वी यादव को बिहार में अपने ही पार्टी के अंदर या सहयोगी दल अपना नेता मान पाएंगे?

तेजस्वी यादव: अभी नेता का सवाल कहां हैं? अभी तो हमें लंबी लड़ाई लड़नी है और जिसके लिए हम सभी एक मंच पर आ रहे हैं। हां, विरोधी इन बातों का भ्रम फैलाने की कोशिश जरूर करेंगे, जैसे उत्तर प्रदेश में मायावती-अखिलेश यादव के गठबंधन के बारे में की जा रही है। दोनों नेता इससे बेपरवाह हैं। हम भी अब इन सब बातों की अधिक परवाह नहीं करते हैं। जहां तक अपनी पार्टी के नेता की बात है, मैं खुद को बेहद खुशनसीब मानता हूं, जिस तरह सीनियर नेताओं ने मुझे सपोर्ट किया है।

- इन दिनों आप आरजेडी का विस्तार करने के लिए तमाम नेताओं से मिल रहे हैं। इसके पीछे क्या रणनीति है और कौन-कौन आपके निशाने पर हैं?

तेजस्वी: मैं इसे दूसरे हिसाब से देखता हूं। राज्य और देश में अभी कई ऐसे लोग हैं, जो आइडिया ऑफ इंडिया को बचाकर रखना चाहते हैं। राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन हम समाज से नफरत को हटाना चाहते हैं। ये अब एक मंच पर आने की कोशिश कर रहे हैं ताकि एक साथ लड़ सके। यही कारण है कि शत्रुघ्न सिन्हा हों या कीर्ति आजाद या यशवंत सिन्हा कई ऐसे लोग अब आवाज उठा रहे हैं।

- इनमें क्या कुछ आरजेडी का हिस्सा भी बन सकते हैं?

तेजस्वी: कीर्ति आजाद हों या शत्रुघन सिन्हा या केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा या कोई और जो इस लडा़ई में हमारे साथ हैं, उनका स्वागत है। हमें खुशी होगी अगर ये साथ आते हैं। पिछले महीन जीतन मांझी भी साथ आए। हमें इनमें से किसी से परहेज नहीं है। वैसे भी हमारा कुनबा तो बढ़ता चला जा रहा है।

- अगर जरूरत पड़ी तो नीतीश कुमार से फिर से दोबारा गठबंधन पर विचार हो सकता है?

तेजस्वी यादव: बिल्कुल नहीं। नीतीश कुमार ने जो किया है उसके लिए बिहार की जनता कभी उन्हें माफ नहीं करेगी। संघ मुक्त भारत का नारा देकर जिस तरह संघ युक्त हुए, संघ प्रमुख के साथ मिलकर बिहार का माहौल बिगाड़ने की साजिश का हिस्सा बने उसके बाद पूरे बिहार में नीतीश कुमार को कभी माफ नहीं किया जा सकता। लालू प्रसाद यादव ने बड़े विश्वास के साथ नीतीश कुमार को बिहार में दोबारा स्थापित किया, लेकिन उसके बदले में उन्होंने सामाजिक न्याय की लड़ाई में कैसे धोखा दिया, वह बिहार की जनता देख रही है।

- बिहार में नीतीश और बीजेपी में आपके लिए मजबूत विरोधी कौन है?

तेजस्वी यादव: नीतीश कुमार अब बचे कहा हैं मैदान में। बीजेपी उनके साथ किस तरह का बर्ताव कर रही है, वह सभी देख रहे हैं। नीतीश कुमार के साथ न नेता बचे हैं न जनता। हमारी बिहार में सिर्फ बीजेपी से टक्कर है और 2019 का चुनाव परिणाम बिहार में ऐतिहासिक होगा जिसकी झलक अभी हाल में हुए उपचुनाव में दिख चुकी है। बालू बंदी, नशा बंदी से लेकर नीतीश कुमार की तमाम नीतियों के कारण हर कोई सड़क पर आने को मजबूर है।

- आपकी मोदी सरकार से सबसे बड़ा विरोध किन बातों को लेकर है?

तेजस्वी- विरोध कोई व्यक्तिगत नहीं है। अगर मोदी सरकार आरक्षण को सामप्त करने की साजिश रचे तो चुप रहे? अगर मोदी सरकार संविधान को समाप्त करने की कोशिश करे तो हम चुप रहें? अगर मोदी सरकार दलितों का हक समाप्त करने की कोशिश करे तो हम चुप रहें? एसएससी स्टूडेंट से लेकर किसान तक लाचार होकर सड़क पर उतरें तो साथ न दें?

 

 

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